इन तीन सालों को छोड़कर अब से 15 जनवरी को ही मनायी जायेगी मकर संक्रांति
पिछले साल की तरह आज भी मकर संक्रांति १५ जनवरी को ही मनार्इ जायेगी अन्य जानकारों के नियमानुसार दूसरें साल भी मकर संक्रांति १५ जनवरी को ही मानायी जायेगी इस बार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश १५ जनवरी की सुबह ७ः३६ के समय होगा व षष्टी तिथि का मान १५ जनवरी कि रात ९ः४३ बजे तक रहेगा आैर दिन में १२ बजे तक संक्रांति का पुण्यकाल रहेंगा पिछले साल सूर्य का प्रवेश मकर राशि में १४ जनवरी की शाम को ७ः३० के बाद हुआ था अतः उदय तिथि के कारण संक्रांति १५ जनवरी को मनायी गयी थी
क्या राय है जानकारों कीः
पंडति राघवेंद्र शर्मा बताते है कि इस साल भी संक्रांति १५ जनवरी के दिन ही मनायी जायेंगी साथ ही राजधानी पंचांग व विश्व विजय पंचाग में मकर संक्रांति की यही सही तिथि बतार्इ गयी है ।
पंडित दिवाकर त्रिपाठी बताते है कि
१९४४-२०४४ तक के लिए तैयार श्री वेंकटेश्वर शताब्दी पंचांग से पता चलता है कि वर्ष २०१७,२०२१,२०२१ को हटाकर बाकी के सभी सालों संक्रांति १५ जनवरी के दिन ही मनायी जायेंगी । इन तीन सालों में सूर्य १४ जनवरी की शाम ,रात या दिन के बाद में मकर राशि में प्रवेश करेंगे इसलिए इन सालों में संक्रांति १४ -१५ जनवरी इन दाेनाें दिन मनायी जायेंगी पर अन्य सभी सालों में १५ जनवरी को ही मनायी जायेगी वहीं साल २०८० में मकर संक्रांति का पुण्य काल १६ जनवरी को होगा आैर ये पर्व १५ व१६दोनों ही दिन मनाया जा सकेगा।
कब मनायी जाती है मकर संक्रांतिः
सूर्य अपनी स्वाभाविक गति से हर साल १२ राशियों में जैसें- मेष,व्रष,मिथुन,कर्क,कन्या,तुला ,व्रश्चिक,धनु
मकर,कुंभ,मीन में ३६० अंश का भोग करते हुए सूर्य दूसरी राशि में जाते हैं। धनु राशि को छोड़कर सूर्य जब मकर राशि में आता है तो मकर संक्रांति मनायी जाती है।
पिछले साल की तरह आज भी मकर संक्रांति १५ जनवरी को ही मनार्इ जायेगी अन्य जानकारों के नियमानुसार दूसरें साल भी मकर संक्रांति १५ जनवरी को ही मानायी जायेगी इस बार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश १५ जनवरी की सुबह ७ः३६ के समय होगा व षष्टी तिथि का मान १५ जनवरी कि रात ९ः४३ बजे तक रहेगा आैर दिन में १२ बजे तक संक्रांति का पुण्यकाल रहेंगा पिछले साल सूर्य का प्रवेश मकर राशि में १४ जनवरी की शाम को ७ः३० के बाद हुआ था अतः उदय तिथि के कारण संक्रांति १५ जनवरी को मनायी गयी थी
क्या राय है जानकारों कीः
पंडति राघवेंद्र शर्मा बताते है कि इस साल भी संक्रांति १५ जनवरी के दिन ही मनायी जायेंगी साथ ही राजधानी पंचांग व विश्व विजय पंचाग में मकर संक्रांति की यही सही तिथि बतार्इ गयी है ।
पंडित दिवाकर त्रिपाठी बताते है कि
१९४४-२०४४ तक के लिए तैयार श्री वेंकटेश्वर शताब्दी पंचांग से पता चलता है कि वर्ष २०१७,२०२१,२०२१ को हटाकर बाकी के सभी सालों संक्रांति १५ जनवरी के दिन ही मनायी जायेंगी । इन तीन सालों में सूर्य १४ जनवरी की शाम ,रात या दिन के बाद में मकर राशि में प्रवेश करेंगे इसलिए इन सालों में संक्रांति १४ -१५ जनवरी इन दाेनाें दिन मनायी जायेंगी पर अन्य सभी सालों में १५ जनवरी को ही मनायी जायेगी वहीं साल २०८० में मकर संक्रांति का पुण्य काल १६ जनवरी को होगा आैर ये पर्व १५ व१६दोनों ही दिन मनाया जा सकेगा।
कब मनायी जाती है मकर संक्रांतिः
सूर्य अपनी स्वाभाविक गति से हर साल १२ राशियों में जैसें- मेष,व्रष,मिथुन,कर्क,कन्या,तुला
मकर,कुंभ,मीन में ३६० अंश का भोग करते हुए सूर्य दूसरी राशि में जाते हैं। धनु राशि को छोड़कर सूर्य जब मकर राशि में आता है तो मकर संक्रांति मनायी जाती है।
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