Thursday, 7 January 2016

                                                 पढाइ भी एक कला                                   
यदि कोइ आपसे यह कहे कि आप पढना नहीं जानते तो हो सकता है कि आपकोे बुरा लगें जाहिर है पढना तो आपने बचपन से सीखा होगा पर पढाइ पूरी होने के बाद आपने अपने करियर में कोइ खास उन्नति नहीं की तो आप अवश्य ही अपूण पाठक रहे होगेेेंं पर अब भी निराश होने की जरूरत नहीं अभी भी देर नहीं हुइ अगर आप पढने की कला सीख लेें तो आपकों बहुत लाभ होगा इससे आप अपनी योग्यता को बढा सकते है पढने की कला विकसित करने के लिए पहलें एक पैराग्राफ पढे व बिना देखे लोगों को बता सकेें यदि आप ऐसा करने मेें सफल हुये तो ठीक है वरना आपकों कला सीखने की जरूरत है कि आपने जितना भी पढा है उसे पूँछे जाने पर बता सके व समझकर पढें                                                
पढने की विशेष व कुछ जरूरी कियाएँ हाेती है छात्रों में सामान्य गति से        भी सरसरी तौर से पढ सकने की योगयता होना चाहिए स्वामी विवेकानंद एक दिन में 200-200 पन्नों की दो दो पुस्तके पढ जाते थे व उसे पूरी तरह अपने मन व दिमाग में बसा लेते थे ये कला अभ्यास से आती है आप भी इस तरह पढे कि किताब से तत्व व निचोड को निकालते जाएं जैसे दूध से मलाइ व पढी हुइ चीजों  के साधारण अथ में समझते जाएं व पढते समय दिनांक वष्  ध्यान रखे तो आप ये बातें कभी नहीे भूलेगें व पढने की एक और कला होती है वो है पढी हुइ सामग्री को संक्षेप में करने की उसकी रूपरेखा तैयार करने की व तैयार नोटस को पढने की
 इस तरह के अभ्यास से वे लोग जो पहले ही औसत से  अच्छें पढने वाले है कुछ ही सप्ताह में अपनी पढने की गति 100 प्रतिशत व 90 प्रतिशत तक बढा सकतें है
 

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