परीक्षा के दिनाें में बचे तनाव से
परीक्षा के दिनों में अक्सर प्रतिभाशाली बच्चों में भी तनाव ,चिंता ,अवसाद के लक्षण
दिखने लगते है इसका असर बच्चे के स्वास्थ पर तो पड़ता ही है परीक्षा भी प्रभावित होती है परीक्षा के अंक व मेरिट कम हो जाती है परीक्षा के समय तनाव के निम्न कारण हो सकते हैं-पहला यह है कि कर्इ बच्चों में इसके बीज अनुवांशिक होते है दूसरें कर्इ बार सब कुछ एक साथ करने की जल्दबाजी में भी एेसा हो जाता है आैर तीसरा शिक्षक-अभिभावक की अपेक्षाआें,उम्मीदों पर खरा उतरने के दबाव में भी बच्चों में तनाव बढ़ जाता है इसलिए अभिभावकों को तनाव बढ़ाने कारणों से बचना चाहिए।
बच्चों पर एेसी बंदिशें न लगायें जिनका पालन अभिभावक खुद नहीं करते है मसलन टीवी देखने से मना करें तो खुद भी न देंखे बच्चों को बड़ा लक्ष्य न दें उन पर यह न थोपें कि इतने घंटे आैर इतने समय पढ़ना है । कोर्इ भी लक्ष्य व टाइम टेबिल बच्चों की सहमति से ही तय करें बच्चों के सामने एेसा लक्ष्य भी न रखें जो उनके आर्इक्यू लेवल से अधिक हो। यह न कहें कि इतने फीसदी अंक लाने है ,इसके बजाय सिर्फ पढ़ार्इ व प्रयास पर ही ध्यान केंद्रित करने को प्राेत्साहित करें अभिभावक व शिक्षक बच्चों के सामने परीक्षाआें का हौवा खड़ा करने के बजाय उनकी व्यक्तिगत काउन्सिलंग करें यदि बच्चा एंक्जाइटी का शिकार हो रहा है तो उसे मनोचिकित्सक को दिखाए व उनकी सलाह के अनुसार ही कोर्इ कदम उठायें खुद से कोर्इ दवा न दें।
एक साथ कर्इ कार्यों को निबटाने की प्रव्रति से बचें।
पढ़ने की पाबंदी ठीक नहीं ,यह तनाव का कारण बन सकता है।
छात्र को कोर्इ दिक्कत हो तो उसकी काउंसलिंग करायें ।
खुद ही चिकित्सक बनने की कोशिश ने करें।
मनोचिकित्सक से तनाव दूर करने के उपाय पूँछे।
परीक्षा के दिनों में अक्सर प्रतिभाशाली बच्चों में भी तनाव ,चिंता ,अवसाद के लक्षण
दिखने लगते है इसका असर बच्चे के स्वास्थ पर तो पड़ता ही है परीक्षा भी प्रभावित होती है परीक्षा के अंक व मेरिट कम हो जाती है परीक्षा के समय तनाव के निम्न कारण हो सकते हैं-पहला यह है कि कर्इ बच्चों में इसके बीज अनुवांशिक होते है दूसरें कर्इ बार सब कुछ एक साथ करने की जल्दबाजी में भी एेसा हो जाता है आैर तीसरा शिक्षक-अभिभावक की अपेक्षाआें,उम्मीदों पर खरा उतरने के दबाव में भी बच्चों में तनाव बढ़ जाता है इसलिए अभिभावकों को तनाव बढ़ाने कारणों से बचना चाहिए।
बच्चों पर एेसी बंदिशें न लगायें जिनका पालन अभिभावक खुद नहीं करते है मसलन टीवी देखने से मना करें तो खुद भी न देंखे बच्चों को बड़ा लक्ष्य न दें उन पर यह न थोपें कि इतने घंटे आैर इतने समय पढ़ना है । कोर्इ भी लक्ष्य व टाइम टेबिल बच्चों की सहमति से ही तय करें बच्चों के सामने एेसा लक्ष्य भी न रखें जो उनके आर्इक्यू लेवल से अधिक हो। यह न कहें कि इतने फीसदी अंक लाने है ,इसके बजाय सिर्फ पढ़ार्इ व प्रयास पर ही ध्यान केंद्रित करने को प्राेत्साहित करें अभिभावक व शिक्षक बच्चों के सामने परीक्षाआें का हौवा खड़ा करने के बजाय उनकी व्यक्तिगत काउन्सिलंग करें यदि बच्चा एंक्जाइटी का शिकार हो रहा है तो उसे मनोचिकित्सक को दिखाए व उनकी सलाह के अनुसार ही कोर्इ कदम उठायें खुद से कोर्इ दवा न दें।
एक साथ कर्इ कार्यों को निबटाने की प्रव्रति से बचें।
पढ़ने की पाबंदी ठीक नहीं ,यह तनाव का कारण बन सकता है।
छात्र को कोर्इ दिक्कत हो तो उसकी काउंसलिंग करायें ।
खुद ही चिकित्सक बनने की कोशिश ने करें।
मनोचिकित्सक से तनाव दूर करने के उपाय पूँछे।
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