nickey
Move to Inbox
More
4 of 68
(no subject)
|
Jan 5 (1 day ago)
![]() |
पढाइ भी एक कला
पढने की विशेष व कुछ जरूरी कियाएँ हाेती है छात्रों में सामान्य गति से भी सरसरी तौर से पढ सकने की योगयता होना चाहिए स्वामी विवेकानंद एक दिन में 200-200 पन्नों की दो दो पुस्तके पढ जाते थे व उसे पूरी तरह अपने मन व दिमाग में बसा लेते थे ये कला अभ्यास से आती है आप भी इस तरह पढे कि किताब से तत्व व निचोड को निकालते जाएं जैसे दूध से मलाइ व पढी हुइ चीजों के साधारण अथ में समझते जाएं व पढते समय दिनांक वष् ध्यान रखे तो आप ये बातें कभी नहीे भूलेगें व पढने की एक और कला होती है वो है पढी हुइ सामग्री को संक्षेप में करने की उसकी रूपरेखा तैयार करने की व तैयार नोटस को पढने की इस तरह के अभ्यास से वे लोग जो पहले ही औसत से अच्छें पढने वाले है कुछ ही सप्ताह में अपनी पढने की गति 100 प्रतिशत व 90 प्रतिशत तक बढा सकतें है
|
| ||||||||||
Move to Inbox
More
4 of 68
(no subject)
|
Jan 5 (1 day ago)
![]() |
पढाइ भी एक कला
पढने की विशेष व कुछ जरूरी कियाएँ हाेती है छात्रों में सामान्य गति से भी सरसरी तौर से पढ सकने की योगयता होना चाहिए स्वामी विवेकानंद एक दिन में 200-200 पन्नों की दो दो पुस्तके पढ जाते थे व उसे पूरी तरह अपने मन व दिमाग में बसा लेते थे ये कला अभ्यास से आती है आप भी इस तरह पढे कि किताब से तत्व व निचोड को निकालते जाएं जैसे दूध से मलाइ व पढी हुइ चीजों के साधारण अथ में समझते जाएं व पढते समय दिनांक वष् ध्यान रखे तो आप ये बातें कभी नहीे भूलेगें व पढने की एक और कला होती है वो है पढी हुइ सामग्री को संक्षेप में करने की उसकी रूपरेखा तैयार करने की व तैयार नोटस को पढने की इस तरह के अभ्यास से वे लोग जो पहले ही औसत से अच्छें पढने वाले है कुछ ही सप्ताह में अपनी पढने की गति 100 प्रतिशत व 90 प्रतिशत तक बढा सकतें है
|
| ||||||||||
Show details
|

No comments:
Post a Comment