सफलता चाहिए तो लक्ष्य के प्रति समर्पित हों
बोर्ड परीक्षा को जीतना है,तो लक्ष्य के प्रति समर्पण होना चाहिए अपने लक्ष्य पर एकाग्र रहना,परेशानियों से घबराएं बिना अपनी चुनी हुर्इ राह पर चलते जाना आैर अपने सपनों को किसी भी कीमत पर न छोड़ना यहीं कुंजी है परीक्षा में सफलता की। हर समय हमारें चारों आेर की स्थितयां एक जैसी नहीं होती है परीक्षा में तैयारी करते समय एकाग्रता को भंग करने वाली बहुत सी घटनाएं भी सामने आती है द्रढतापूर्वक इनका मुकाबला करें रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाआें का प्रभाव परीक्षा की तैयारी पर रंच मात्र भी न आए एेसा प्रत्येक विघार्थी को ध्यान में रखना चाहिए लेकिन एेसा वहीं कर सकते है जो धुन के पक्के होते है। बोर्ड परीक्षा में कुछ कर दिखाने की तमन्ना है तो अपने लक्ष्य के बारें में स्पष्ट नजरिया रखें आपको कितने प्रतिशत या कौन सी श्रेणी चाहिए या किसके बराबर अाना है एेसे लक्ष्य तय कर लेने पर तैयारी में मदद मिलती है यदि लक्ष्य तय नहीं है तो चाहे जितनी भी मेहनत की जाए उसके अनुपात में उसका वांछित परिणाम प्राप्त नहीं होता है दरअसल ,बोर्ड परीक्षाएं प्रत्येेक छात्र के कुॅरियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है इसके बाद परीक्षार्थी को कहाँ प्रवेश मिलेगा ?क्या विषय मिलेंगे ,आदि बातें परीक्षा में प्राप्त अंकों पर निर्भर करती हैं। बोर्ड परीक्षाआें में सफलता का अर्थ केवल उत्तीर्ण हो जाना ही नहीं होता है प्रतिशत क्या आया,कौन सी श्रेणी या स्थान आया है,यह बहुत मायने रखता है इसलिए बेहतर परिणाम के लिए खिलाड़ी की तरह जुझारू होना जरुरी है हरदम एक जैसी स्थितयां नहीं रहती है कुछ बार जो टाइम टेबल बनायी गयी होती है उसका नियामाुसार पालन नहीं हो पाता है घर में अचानक कर्इ लोग आ जाते है ,बैठने की जगह नहीं रहती है हर जगह शोर होता रहता है एेसे में द्रढ़ संकल्प व जुझारूपन ही यह निर्भर करेगा के कैसे अति व्यस्त घर में पढ़ने लायक स्थान खोजें आैर हर चिंता या भटकाव से मुक्त होकर पढ़ार्इ करें। बोर्ड परीक्षाआें में संघर्षपूर्ण तैयारी का माददा बनाये रखना एक लंबी प्रकिया है एक जैसी कार्य प्रक्रति के कारण पढ़ार्इ में मन लगाना आसान काम नहीं है इसलिए तैयारी की प्रकिया चरणबद्घ होनी चाहिए क्रमवार तैयारी का लक्ष्य बनाने से चीजें आसान होती जाती है सबसे बड़ी बात है हार न मानने की द्रढ़ इच्छा शक्ति मतलब अंतिम समय तक जीत के लिए प्रयास करते रहना इसलिए इस सूत्र को गाँठ बांध लेना जरूरी है परीक्षाआें में जितनी तैयारी की है इसक लिए सतत तैयारी की जरुरत होती है ,जो धीरे-धीरे ही आती है खरगोश की तरह जोश में भागेंगे तो थककर सो जाएंगे लेकिन कछुए की तरह धीमी गति से निरंतर अभ्यास करके लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लेंगे। संक्षिप्त नाेटसः लक्ष्य के प्रति द्रढ़ रहें ,बाधाआें से घबराये नहीं। धुन के पक्के हैं तो सफलता चरण चूमेगी। अति व्यस्त घर में भी पढ़ने लायक जगह ढूंढ निकालें। परीक्षा की तैयारी चरणबद्घ तरीके से करें। अंतिम समय तक जीत के लिए प्रयास जारी रखें।
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Saturday, 23 January 2016
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