लगातार पढा़र्इ ठीक नहीं
बोर्ड परीक्षाएं हौवा नहीं होती है ,इस लिए तनाव पाल लेने आैर दवाब में आकर लगातार पढ़ते रहना घातक हो सकता है । परीक्षा के मानसिक दबाव में अक्सर छात्र एम्नेसिया व एक्जाम फोबिया के शिकार हो जाते है ,िजसकी वजह से स्म्रतिभ्रंश् के कारण कुछ भी सोच पाना मुशिकल हो जाता है । परीक्षा में अव्वल आना है तो याद रखिए प्रत्येेक सफलता के पीछे ज्ञान से ज्यादा प्रभाव कार्य मूर्त रुप देने का महत्वपूर्ण हाथ होता है आपने यदि बहुत कुछ पढ़ा है लेकिन उसे कक्ष में िलखना नहीं पाते तो सारी पढ़ार्इ बेकार है। अध्ययन के दौरान अंतराल देने से पढ़ी हुर्इ चीजे याद रहती है । इसलिए छात्रों को चाहिए कि वह लम्बे समय तक एक ही विषय को न पढ़े ,थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद विषय बदलते रहें इससे पढ़ने
में मन लगेगौ हाँ ,परीक्षा के दौरान पढ़ार्इ के घंटे अवश्य बढ़ा दें।
प्रत्येेक मेधावी छात्र की स्कूल के अलावा घर पर रोज चार -पाँच घंटे पढ़ने की आदत होती ही है ,बस समय में दो घंटे का इजाफा या ब्रेक लें तो परीक्षा में बेहतर परिणाम से कोर्इ रोक नहीं सकता है । परीक्षाथी दिनचर्या को एेसा बनाये कि छाेटे -छोटे अंतराल के बीच अध्ययन का समय हो।रात
को सोने से पहले दिनभर पढ़ी चीजों को दोहरायें इससे विषय वस्तु आैर पढ़ी चीजे दिमाग में बैठ जाती है । सुबह के समय पढा़र्इ अवश्य करें ये दिन रात की चार घंटे कि पढ़ार्इ के बराबर होती है ।
मन हल्का करने के लिए पढा़र्इ के बीच -बीच में अपनी रूचि का कोर्इ काम करें । जैसे टी०वी० देखना ,बैडमिनटन खेलना ,मित्रों से फोन पर बात करना ,घूमने निकल जाना। जब आप इन गतिविधयों में संलग्न हों तो इस दौरान मन में परीक्षा के भूत को न लाएं। इससे तनाव कम करने में मदद मिलती है । एक बात आैर ,यदि साल भर आपने परीक्षा सारणी का पालन नहीं किया है तो कम से कम परीक्षा के दौरान इसका पालन अवश्य करें ।
यदि आपने सालभर पढ़ार्इ नहीं कि है तो एक माह में सारा पाठयक्रम सारणी का पालन करते हुए अवश्य पढ़े।
प्रत्येक प्रश्न पत्र व उसके खंडों को हल करते समय ,समय सीमा का ख्याल अवश्य रखें।
उत्साही के लिए संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं है। उत्साह ही कार्य में सफलता प्रदान करती है ।
वा.रामायण
शिक्षा प्राप्त करने के तीन आधार स्तंभ है ,अधिक निरीक्षण करना ।
केथराल
लक्ष्य को ही अपना जीवन कार्य समझाें । हर क्षण उसी का चिंतन करों , उसी का स्वपन देखों आैर उसी के सहारें जीवित रहों ।
विवेकानंद
थोड़ा पढ़ना ,अधिक सोचना, कम बोलना ,अधिक सुनना, ये बुद्घिमान बनने के उपाय हैं।
रविन्द्रनाथ ठाकुर
बोर्ड परीक्षाएं हौवा नहीं होती है ,इस लिए तनाव पाल लेने आैर दवाब में आकर लगातार पढ़ते रहना घातक हो सकता है । परीक्षा के मानसिक दबाव में अक्सर छात्र एम्नेसिया व एक्जाम फोबिया के शिकार हो जाते है ,िजसकी वजह से स्म्रतिभ्रंश् के कारण कुछ भी सोच पाना मुशिकल हो जाता है । परीक्षा में अव्वल आना है तो याद रखिए प्रत्येेक सफलता के पीछे ज्ञान से ज्यादा प्रभाव कार्य मूर्त रुप देने का महत्वपूर्ण हाथ होता है आपने यदि बहुत कुछ पढ़ा है लेकिन उसे कक्ष में िलखना नहीं पाते तो सारी पढ़ार्इ बेकार है। अध्ययन के दौरान अंतराल देने से पढ़ी हुर्इ चीजे याद रहती है । इसलिए छात्रों को चाहिए कि वह लम्बे समय तक एक ही विषय को न पढ़े ,थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद विषय बदलते रहें इससे पढ़ने
में मन लगेगौ हाँ ,परीक्षा के दौरान पढ़ार्इ के घंटे अवश्य बढ़ा दें।
प्रत्येेक मेधावी छात्र की स्कूल के अलावा घर पर रोज चार -पाँच घंटे पढ़ने की आदत होती ही है ,बस समय में दो घंटे का इजाफा या ब्रेक लें तो परीक्षा में बेहतर परिणाम से कोर्इ रोक नहीं सकता है । परीक्षाथी दिनचर्या को एेसा बनाये कि छाेटे -छोटे अंतराल के बीच अध्ययन का समय हो।रात
को सोने से पहले दिनभर पढ़ी चीजों को दोहरायें इससे विषय वस्तु आैर पढ़ी चीजे दिमाग में बैठ जाती है । सुबह के समय पढा़र्इ अवश्य करें ये दिन रात की चार घंटे कि पढ़ार्इ के बराबर होती है ।
मन हल्का करने के लिए पढा़र्इ के बीच -बीच में अपनी रूचि का कोर्इ काम करें । जैसे टी०वी० देखना ,बैडमिनटन खेलना ,मित्रों से फोन पर बात करना ,घूमने निकल जाना। जब आप इन गतिविधयों में संलग्न हों तो इस दौरान मन में परीक्षा के भूत को न लाएं। इससे तनाव कम करने में मदद मिलती है । एक बात आैर ,यदि साल भर आपने परीक्षा सारणी का पालन नहीं किया है तो कम से कम परीक्षा के दौरान इसका पालन अवश्य करें ।
यदि आपने सालभर पढ़ार्इ नहीं कि है तो एक माह में सारा पाठयक्रम सारणी का पालन करते हुए अवश्य पढ़े।
प्रत्येक प्रश्न पत्र व उसके खंडों को हल करते समय ,समय सीमा का ख्याल अवश्य रखें।
उत्साही के लिए संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं है। उत्साह ही कार्य में सफलता प्रदान करती है ।
शिक्षा प्राप्त करने के तीन आधार स्तंभ है ,अधिक निरीक्षण करना ।
लक्ष्य को ही अपना जीवन कार्य समझाें । हर क्षण उसी का चिंतन करों , उसी का स्वपन देखों आैर उसी के सहारें जीवित रहों ।
थोड़ा पढ़ना ,अधिक सोचना, कम बोलना ,अधिक सुनना, ये बुद्घिमान बनने के उपाय हैं।
रविन्द्रनाथ ठाकुर
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